Delhi Pollution: अभी अपनाएँ ये 12 बचाव तरीके, वरना देरी हो जाएगी

दिल्ली के वायु प्रदूषण की बात करें तो हर सालएक अलग ही चरम सीमा पे पहुंच जाता है और यह दिल्ली तक ही नहीं बल्कि दिल्ली के आसपास के इलाके जैसे की गुड़गांव, नोएडा को भी  चपेट में ले लेटा है। 

धुंध, स्मॉग, वाहनों का बढ़ना, पराली जलाना, कनस्ट्रक्शन कार्य, फैक्टरियों का धुआ यह सब मिलकर हवा को इतना ज्यादा प्रदूषित बना रहे हैं की सांस लेना भी बहुत मुश्किल हो रहा है.

 2025 में तो यह समस्या बहुत ज्यादा बढ़ गई है तो ऐसे में आप अपना और अपने परिवार की सेहत का ध्यान कैसे रखें, कैसे इस दिल्ली के प्रदूषण से बचा जाए तो इस लेख में हम लोग इसी के बरे में बात करेेंगे। 

दिल्ली के प्रदूषण से बचने के उपाए | Ways to Avoid Delhi’s Pollution

घर से बहार निकलना कम करें 

जब AQI300 से ऊपर हो जाए मतलब हवा बहुत ज्यादा खराब हो गई है, खराब ही नहीं खतरनक श्रेणी में आ गई है तो जरूरी कामों के अलावा घर से निकलना बंद कर दे  

  • सुबह हो या रात हवा अधिक प्रदूषित रहती ह इसलिए इन समय में बाहर ना निकले 
  • बच्चों और बुजुर्गो या जिन्हें अस्थमा एलर्जी की समस्या है उनके साथ यह नियम भी लागु होता है। 

N95 Mask या N99 Mask का उपयोग करें। 

सिंपल क्लॉथ मास्क या मेडिकल मास्क प्रदूषण से नहीं बचाते। दिल्ली जैसी जगहों पे पोललुटेंट PM2.5 और PM10 बहुत ज्यादा होते हैं जिन्हें रोकने के लिए N95 या N99  मास्क जरूरी होता है। 

  • मास्क चेहरे पर ठीक से फिट होना चाहिए  
  • मास्क को रोजना बदले या फिर साफ करें। अगर washable  मास्क हो तो और ज्यादा बढ़िया 
  • Reusable Pollution Mask carbon filters के साथ सबसे बेहतर रहते हैं 

घर की हवा को साफ रखना बेहद आवश्यक 

दिल्ली के बाहरी वातावरण की तरह घर के अंदर की हवा भी दूषित हो जाती है इसलिए यह कदम उठाएं खिडकियां सुबह-सुबह एक घंटा ही खोलें जब हवा थोड़ी सी साफ हो 

  • घर में धूल साफ रखने के लिए रोज मोपिंग या वेक्यूम क्लीनिंग करें। 
  • HEPA Filter वाला air purifier इस्तेमाल करें
  • रूम में हवा के सरकुलेशन के लिए एग्जास्ट का इस्तेमाल करें। 

बाहर जाते समय सावधानिया जरूरी 

यदि  बाहर जाना जरूरी हो तो कुछ महत्वपूर्ण बात ध्यान में रखें। 

  • कार या टैक्सी पर चलते समय खिड़किया बंद रखें। 
  • अधिक ट्रेफिक वाली सड़कों से बचे 
  • शारीरिक गतिविधियां जैसे जॉगिंग रनिंग प्रदूषण में ना करें। 
  • पार्क में भी स्मॉग के समय एक्सरसाइज़ से बचें, क्योंकि भारी सांसों से ज्यादा प्रदूषण शरीर में जाता है।

Saline Water से नाक की सफाई करें

दिन में 1–2 बार saline nasal rinse (नाक की सफाई)
या फिर nasal spray का उपयोग करें।

इससे:

  • फेफड़ों पर PM2.5 की लोड नहीं पड़ती
  • सांस लेने में आसानी होती है
  • एलर्जी कम होती है
  • योगिक क्रिया “जल-नेति” भी बेहद प्रभावी है।

इंडोर पौधे लगाएं क्योंकी प्राकृतिक  एयर प्यूरीफायर  है। 

NASAकी एक रिपोर्ट के अनुसार कई पौधे घर की हवा को शुद्ध करते हैं जैसे की 

  • स्नेक प्लांट (Snake Plant)
  • पीस लिली (Peace Lily Plant)
  • एरेका पाम ( Areca Palm Plant)
  • अंग्रेजी आइवी (English Ivy Plant)
    ये पौधे कार्बन मोनोऑक्साइड, फॉर्मल्डिहाइड और टॉक्सिक गैसों को कम करने में मदद करते हैं। 

इम्यूनिटी बढ़ाने  की कोशिश करें। 

प्रदूषण हमारे फेफड़ों को कमजोर बनाता है। इसलिए सही पोषण हमारे लिए बहुत जरूरी है। 

  • तुलसी, अदरक, हल्दी, काली मिर्च, युक्त काढा फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है। 
  • ओमेगा थ्री (Omega 3) फेटी एसिड वाली चीजेन भी खानी चहिये  जैसे की अखरोट या अलसी क्योंकी यह सुजन को कम करती है। 
  • गर्म या गुनगुने पानी का सेवन करें जो कि  विषाक्त  पदार्थ को बाहर निकाल देता है ।
  • एंटीऑक्सीडेंट से भरपुर फल खायें जैसे की अनार, गाजर, चूकदर, सेब, निंबू 

Lungs-Friendly योग और प्राणायाम

प्रदूषण से बचने के लिए फेफड़ों की एक्सरसाइ करना बहुत जरूरी है। इसके लिए आप कुछ एक्सरसाइ कर सकते हैं। जैसे की 

  • अनुलोम विलोम ( Anulom–Vilom)
  • भस्त्रिका प्राणायाम ( Bhastrika Pranayama)
  • डायफ्रामेटिक ब्रीदिंग (Deep Breathing exercises)
  • सूर्य नमस्कर ( Surya Namskar)
    लेकिन ध्यान रहे की यह एक्सरसाइ घर के अंदर ही करें साफ हवा में। 
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सफर करते समय इन बातो  पर ध्यान दे  

  • सुबह की बजाय दोपहर में यात्रा का प्लान करें जब हवा थोड़ी बेहतर होती है। 
  • यदि  बार-बार  सफर करना पड़ता है तो अपने वाहन में केबिन एयर फिल्टर लगाएं। 
  • संभव हो तो मेट्रो जैसी बंद और फिल्टरइड पर्यवरण वाली पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमल करें। 

सरकार और समाज के स्तर पर भी कुछ चीजे’जरूरी

व्यक्ति अकेले ही इस समस्या का सामाधन नहीं कर सकता। समाज और सरकर की भी समूहिक  भूमिका होती है जैसे की 

  • पराली जलाने पर सख्त नियंत्रण 
  • इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा 
  • ओधोगिक धूएं पर नियंत्रण 
  • ग्रीन बेल्ट को बढ़ावा 
  • निर्माण कार्यों में धूल पर बंधन 

कमरे में आयोनाइज़र या ह्यूमिडिफ़ायर का उपयोग 

कम आद्रता में प्रदूषण का असर अधिक महसूस होता है। Humidity 40–60% रखने की कोशिश करे 

  • ह्यूमिडिफ़ायर  कमरे में नमी संतुलित रखता है जिससे की धूल के कण नीचे बैठ जाते हैं। 
  • आईओनाइजर हवा में मौजूद कणो को भारी बनाकर गिरा देता है। हलअंकी दोनों उपकरण को नियमित साफ रखना बेहद  जरूरी है। 

निष्कर्ष  (Conclusion)

दिल्ली में प्रदूषण पर सीजनल समस्या नहीं है। बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है लेकिन कुछ सावधानीयों और समझदरी भरे कदमों के साथ आप अपना और अपने परिवार का कुछ हद तक बचाव कर सकते हैं। जैसे कि  

  • सही मास्क पहनाना 
  • घर की हवा को साफ रखना 
  • स्वस्थ आहर और प्रणायम 
  • बाहर जाना सीमित करना 
  • इनडोर प्लांट्स लगाना 

यह छोटे-छोटे कार्य  सेहत को सुरक्षित रखने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। 

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