आजकल एक चीज बहुत ज्यादा प्रचालन में है, जिसका नाम है इनोसिटोल (Inositol). इसे मायो-इनोसिटोल (Myo-inositol) या डी-चीरो-इनोसिटोल (D-chiro-inositol) भी कहा जता है। इसे विटामिन B8 भी कहते हैं। लेकिन यह कोई विटामिन नहीं है।
इनोसिटोल (Inositol) हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से बनता है। यह हमारे शरीर में इन्सुलिन के प्रोसेस को बैलेंस करता है। यह एक तरह की शुगर है जो की शरीर में इन्सुलिन के प्रोसेस में सहायता करती है। जो कि हमारी बॉडी खुद बना लेती है।
आजकल की खराब और अनियमित लाइफस्टाइल, जैसे जंक फूड का अधिक सेवन, नींद की कमी, तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण शरीर की कई प्राकृतिक प्रक्रियाएँ प्रभावित हो रही हैं।
इसके अलावा लिवर की कार्यक्षमता कमजोर होने पर शरीर पर्याप्त मात्रा में इनोसिटोल (Inositol) का निर्माण नहीं कर पाता। खासतौर पर जो लोग अधिक मात्रा में शुगर और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का सेवन करते हैं, उनमें इनोसिटोल का प्राकृतिक निर्माण बाधित हो जाता है, जिससे शरीर में इसकी कमी देखने को मिल सकती है।
इसकी कमी ज्यादातर महिलाओं में देखने को मिलता है।अगर इनोसिटोल (Inositol) की कमी हो जाए तो हॉर्मोन असंतुलित, इन्सुलिन में बढ़ोतरी और सेल मेम्ब्रेन में इम्बलेंस हो सकती है।
इनोसिटोल (Inositol) मुख्य रूप से दो रूप में होता है।
- मायो-इनोसिटोल (Myo-inositol)
- डी-चीरो-इनोसिटोल (D-chiro-inositol)
इनोसिटोल (Inositol) के फायदे
इनोसिटोल (Inositol) शरीर में कई तरह के कार्य करने में सहायता करता है जैसे कि इन्सुलिन को नियमित करना और न्यूरोट्रांसमीटर की बंधनी तो चलीये बात करते हैं इसके फायदों के बारे में।
गर्भावस्था के दौरान मधुमेह
जब महिलाऐं गर्भवती होती हैं तो शुगर की संभावना अक्सर महिलाओं में देखने को मिलती हैं। यह एक रिसर्च में भी देखा गया है की गर्भवती महिलाओं में शुगर का खतरा ज्यादा देखने को मिलता है। क्योंकी उनकी बॉडी में इन्सुलिनन अच्छे से काम नहीं करता। तो इनोसिटोल (Inositol) गर्भवती महिलाओं में शुगर की संभावना को कम करता है जिससे उन्हें फायदा मिलता है।
सेल फंक्शन ओर सिगनल
इनोसिटोल (Inositol) सेल मेम्ब्रेन का एक घटक है ये सेल सिगनल में भी मदद करताहै जिससे की शरीर में वीभिन्न हॉर्मोन खास करके इंसुलिन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए
इनोसिटोल (Inositol) मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी योगदन देता है. यह खासकर सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे रसायन बैलेंस करता है ,जो कि मूड और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।
PCOS में मदद
PCOS एक सामान्य हॉर्मोन समस्या है जो कि महिलाओं में अनियमित माहवारी, इन्सुलिन प्रतिरोध और उपज में कठिनाई का कारण बनती है. रिसर्च से पता चलता हैकि PCOS में इंसुलिन रेसीस्टेंस बढ़ जाता है,जिससे की बॉडी का BMI भी बढ़ने लगता है माहवरी का साइकिल खराबी भी हो जाती है।
इनोसिटोल (Inositol) के इस्तेमाल से यह महिलाओ की यह प्रोबलेम ठीक होती हैं और मासिक चक्र भी सामान्य हो सकता है।
मायो-इनोसिटोल और D-chiro-inositol महिलाओं के इंसुलिन को बढ़ने नहीं देता और अंडोत्सर्ग (ovulation) को सुधारने में भी मदद करता है। (1)

प्रजनन क्षमता में फायदेमंद
कुछ शोधों से पाया गया है कि मायो-इनोसिटोल अंडोत्सर्ग दर (ovulation rate) और गर्भधारण में सुधार कर सकता है. खास करके PCOS वाली महिलाओं में। अगर आप PCOS का शिकार है। मायो-इनोसिटोल आपकी मदद कर सकता है। (2)
ब्लड शुगर लेवल कम करें
मायो-इनोसिटोल (Myo-inositol) या डी-चीरो-इनोसिटोल (D-chiro-inositol) फोलिक एसिड के साथ देने से टाइप 1 शुगर की सेंसिटिविटी को बढ़ाया जा सकता है। जिससे की टाइप 1शुगर के पीड़ित लोगों को फायदा मिलता है।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद
कुछ रिसर्च में पाया गया है की इनोसिटोल (Inositol) डिप्रेशन,एंजाइटी, स्ट्रेस जैसे लक्षणों को कम करने में भी मदद कर सकता है। यह दिमाग में रासायनिक संतुलन के करण मूड को बेहतर करता है। (3)
बालो के लिए फायदेमंद
इनोसिटोल (Inositol) बालो को बढ़ाने में भी फायदा देता है। इसके अलावा अगर आपके बाल रूखे सूखे रहते हैं, बाल झड़ रहे हैं, बाल पतले हो रहे हैं। तो भी यह बाल की सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इसे राइस वॉटर के साथ ट्रीटमेंट लेने से काफी अच्छा फायदा देखने को मिलता है।
नींद के लिए बेहतर
वैसे तो नींद के लिए बहुत से सप्लीमेंट है, लेकिन इसके लिए भी रिसर्च कर रहे हैं कि यह सप्लीमेंट आपके नींद में सुधार ला सकता है या नहीं।
गर्भवती महिलाओं पर एक छोटी सी रिसर्च हो चुकी है, जिसमें यह पाया गया है की इनोसिटोल सप्लीमेंट लेने से नींद में भी सुधार देखने को मिलता है।
इनोसिटोल के नुकसान | Inositol Side Effects
इनोसिटोल के कोई जयदा बड़े साइड इफेक्ट्स नहीं देखें को मिलते छोटे मोटे हो सकते है जैसे कि
- दस्त
- मतली
- पेट दर्द
- पेट में गैस
- थकान
- चक्कर आना।
सावधानीयां
गर्भवती या स्तानपन करवाने वाली महिलाओं को इनोसिटोल लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरुर लेनी चाहिए।
इनोसिटोल की डोज़
इनोसिटोल एक सप्लीमेंट है।ये 2 तरह से मार्केट में उपलब्ध है तो इसकी डोज भी थोड़ी अलग-अलग हो। सकती है जैसे कि
PCOS के लिए : 2 ग्राम इनोसिटोल दिन में दो बार
मानसिक स्वास्थ्य या एंजाइटी के लिए 12 से 18 ग्राम प्रतिदिन
कितनी देर लेना है : कम से कम 10 हफ्ते लेना सुरक्षित माना गया है, क्योंकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य परिस्थितियों पर इसका असर अलग-अलग हो सकता है।
निष्कर्ष
इनोसिटोल एक प्राकृतिक इंग्रेडिएंट है जो की हमारा शरीर खुद बना लेता है फिर भी इसकी कमी हो जाती है यह विशेष कर इन्सुलिन के सिग्नल, हॉर्मोन संतुलित और न्यूरोट्रांसमीटर को प्रभावित करता है। इसके मुख्य फायदे PCOS में सुधार, ब्लड शुगर नियंत्रित और कुछ मानसिक स्वास्थ्य में देखने को मिलते हैं।
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