बवासीर के लक्षण और बचाव : Piles in Hindi

piles

बवासीर (Piles) एक ऐसी बीमारी है जिसे लोग दूसरों के सामने बताने से शर्माते हैं लेकिन इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। बवासीर को अंग्रेजी में पाइल्स (Piles) या हेमोरॉयड्स (Hemorrhoids) भी कहते हैं। यह दो प्रकार की होती है इंटरनल पाइल्स और एक्सटर्नल पाइल्स.बवासीर में मल त्याग के द्वार के वक्त असहनीय दर्द होता है और कई बार तो खून भी आ जाता है इसलिए बवासीर का वक्त रहते इलाज करना ज़रूरी है। 

बवासीर में हमारे मलद्वार के आसपास की नसें सूज जाती है जिससे मल करने में तकलीफ होती है यहां तक कि बैठने में भी तकलीफ का सामना करना पड़ता है। इंटरनल पाइल्स में यह अंदर की तरफ सूज जाती है, जिन्हें पहचानना थोड़ा मुश्किल रहता है, इलाज में भी तकलीफ़ होती है और एक्सटर्नल पाइल्स में नसे बाहर की तरफ होती हैं जिन्हें क्रीम इत्यादि से ठीक किया जा सकता है। 

बवासीर होने के कारण। Cause of Piles

आजकल 40 की उम्र से ज्यादा के अधिकतर लोगों को बवासीर का सामना करना पड़ रहा है। इसके बहुत से कारण हो सकते हैं जैसे कि

1.कब्ज 

अगर आपको कब्ज है तो इसका जल्दी से जल्दी इलाज करना चाहिए।कब्ज में आपको माल बहुत टाइट आता है, जिससे बवासीर होने का खतरा रहता है। 

2.बाहर का खाना 

आजकल लोग ज्यादा बाहर खाना पसंद करते हैं। बाहर के खाने में फाइबर इत्यादि की कमी होती है जिसकी वजह से बवासीर हो जाती है। 

3.मोटापा 

मोटापा ज्यादा होने से भी आपकी मांसपेशियां सूज जाती है और उनमें भी कसाव आ जाता है जिसके परिणाम स्वरूप बवासीर होने का खतरा रहता है। 

4.टॉयलेट में ज्यादा देर बैठना 

टॉयलेट में अंग्रेजी सीट पर ज्यादा देर बैठने से भी बवासीर होने का खतरा बन जाता है। 

बवासीर के लक्षण। Piles Symptoms in Hindi

बवासीर के लक्षण हमने आपको शुरू में भी बताए हैं जैसे की 

  • असहनीय दर्द होना
  • पेट साफ होते वक्त मल के साथ खून आना
  • गुदा के पास एक गूमड़ जो दर्दनाक और संवेदनशील हो सकता है। 
  • मलद्वार में खून खुजली होना

बवासीर कैसे रोके :Piles Treatment at Home

वैसे तो मार्केट में कई तरह की दवाइयाँ उपलब्ध है। लेकिन दवाई इस्तेमाल करने से पहले आपको अपना खान पान और लाइफस्टाइल बदलना पड़ेगा। 

  • फाइबर युक्त आहार खाएं,और बस 1 दिन ही ना खाएं, अपने लाइफस्टाइल में ऐड करें। 
  • रोज भरपूर मात्रा में तरल पदार्थ पिए या फिर पानी पिए। 
  • कसरत को अपने जीवन का हिस्सा बताएं। 
  • शौच करने के लिए ज्यादा जोर ना लगाएँ। 
  • ज्यादा एंटीबायोटिक न खाये

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